Wednesday, January 31, 2018

संत रविदास (संत रोहिदास)

संत रविदास (संत रोहिदास) !!




गुरु रविदास का जन्म २५ फरवरी १४३३ यानि १३७६ ईसा में माघ पूर्णिमा, दिन रविवार को बनारस के नज़दीक सीरगोवर्धनपुर अथवा मांडूर्गढ़ नामक स्थान में एक चमार परिवार में हुआ था. रैदासी समुदाय में प्रचिलित एक पद “चौदह सौ तेंतीस को, माघ सुदी पन्दरास. दुखियों के कल्याण हित, प्रगटे सिरी रविदास”- उनकी इस जन्मतिथि की पुष्टि करता है.


वहीँ एक और रैदासी पद “पन्द्रह सौ चौरासी भई चित्तोर मह्भीर. जर-जर देह कंचन भई रवि मिल्यो सरीर” के अनुसार विक्रम संवत १५८४ में वे शहीद हुए थे.


रविदास के पिता का नाम रघुराम और माता का नाम करमा देवी था. इनके पितामह का नाम हरियानंद था और दादी का नाम चतर कौर. गुरुग्रंथ साहब में संकलित पदों में रैदास के चमार होने का उल्लेख बार-बार आया है.


“कही रविदास, खालसा चमारा. जो हम सहरी मीतु हमारा”

अर्थ- यानि “मैं खालिस चमार हूँ, जो मैं मेरे जैसे बोलता या सोचता है वह मेरे जैसा जागृत है है और मेरा मित्र है”


गुरु रविदास एक क्रांतिकारी महाकवि थे, जिन्होंने अपनी वाणी और विचार के माध्यम से ब्राह्मणवादी व्यवस्था पर करारे प्रहार करते हुए इसकी नींव हिला दी थी इसलिए ब्राह्मणवादियों ने अपनी संस्कृति को बचाने के लिए उल्टा रविदास को ही चमत्कारी व्यक्तित्व घोषित कर दिया और उनके जीवनी का उल्लेख करते हुए बहुत सी झूठी और मनगढंत घटनाएं गढ़कर उनके क्रांतिकारी और वैज्ञानिक विचारों को दबाने का कुत्सित प्रयास किया. जैसे- उनका कठौते से कंगन निकालना, अपने शरीर को चीर कर जनेऊ दीखाना, अपने पूर्वजन्म में ब्राह्मण होने के कारण अपनी पैदाइश के समय से ही अपनी चमार माँ का स्तनपान पान करने से इनकार करना आदि.


जाहिर है इन सब अवैज्ञानिक बातों को रविदास के जीवन से जोड़कर ब्राह्मणवादियों ने दलित-बहुजनों को रविदास की क्रांतिकारी-तार्किक शिक्षा से दूर कर उन्हें अंधविश्वास और कल्पनालोक में धकेल कर हिंदूवाद को सफलता से मज़बूत किया.


गौरतलब है कि ऋग्वेद के पुरुषसुक्त में कहा गया है कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र का जन्म ब्रह्मा के मुख से हुआ है. यह सूत्र ही जातिवाद का आधार भी है. पर गुरु रविदास ने इस झूठी बात को सिरे से नकारते हुए कहा-


“ब्राह्मण खतरी, वैस सूद जनम ते नाही. जो चाइह सुबरन कउ, पावै करमन माहि”

अर्थात, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र का जन्मगत आधार समाज विरोधी है. जन्म के आधार पर कोई प्रज्ञावान, बलवान और धनवान नहीं होता, बल्कि व्यक्ति अपने कर्म से श्रेष्ठ और निकृष्ट होता है.


रविदास आगे कहते हैं -

“रविदास एके ब्रह्म का, होई रह्यो सगल पसार. एके माटी सब सजरे, एके सभ कूं सिरजनहार”

अर्थात, संसार के सारे प्राणी एक ही मिट्टी से निर्मित हैं. इस सब का रचनाकार भी एक ही है. अर्थात सभी मानव का शरीर एक ही जैसा है और सभी की उत्पत्ति भी एक बिंदु से होती है. ऐसे में ब्राह्मण और शूद्र के भेद का भला क्या आधार है.


वर्णवाद से होने वाले नुकसान को बताते हुए रविदास कहते हैं “जात-पांत के फेर महि, उरझी रही सभ लोग. मानुषता कूं खात हई, रविदास जात कर रोग”


अर्थात जात-पांत के चक्कर में सारा समाज ही जटिल हो चूका है. सब लोग जाति के जाल में उलझे हुए हैं और उन्होंने अपनी सोच एकदम संकीर्ण बना रखी है. जिससे मानवता के लिए कोई जगह नहीं बची. इस जाति रुपी रोग ने मनुष्यता को नष्ट कर डाला है.


रविदास के ये शब्द उन्नीसवीं सदी में डॉ बाबासाहेब आम्बेडकर द्वारा तैयार भाषण ‘एन्हीलेशन ऑफ कास्ट’ में उभरे है. जहाँ मानवता के मसीहा डॉ आंबेडकर पृ. ५६ में कहते हैं “जाति ने जन-चेतना को नष्ट कर डाला है, जाति ने लोगों में कल्याणकारी भावों को कुचल दिया. दया, प्रेम सहानुभूति, अपनत्व जैसे भावों को केवल अपनी जाति में ही सीमित कर दिया यह सब केवल अपनी जाति से ही शुरू होता है और अपनी जाति के साथ ही खत्म हो जाता है”


गुरु रविदास भी तो समाज को आगाह करते हुए कहा करते थे-

“जात-पांत में जात है, जो केलन की पात. रविदास न मानुष जुड सकैं, जो लौ जात न जात”

अर्थ- यानि जिस प्रकार केले के एक पत्ते के बाद दूसरा और फिर तीसरा और अंतहीन पत्तों का सिलसिला शुरू हो जाता है उसी प्रकार जाति से उत्पन्न वर्गीकृत असमानता से मानवता के लिए कोई जगह नहीं बचती.


रविदास के विचारों को आगे बढाते हुए डॉ आंबेडकर ने जाति व्यवस्था को समूल नष्ट करने के लिए सहभोज और अंतरजातीय विवाह की आवश्यकता पर बल दिया था.


डॉ आंबेडकर जैसें महापुरुषने "द अनटचेबल" नानका अपना ग्रंथ गुरु रविदास यांना समर्पित कीया था.

गुरु रविदास आजीवन पथिक और पथप्रदर्शक बने रहे, उनका स्पष्ट मानना था कि संसार की प्रत्येक वस्तु अनित्य है, क्षणभंगुर है यानि सभी चीज़ों को एक दिन जाना ही है. इसलिए क्यों न इस शरीर को समाज के निर्माण में लगाया जाए. उनके अनुसार किसी बात को ठीक से सोच विचार कर बुद्धि की कसौटी पर परख कर ही मानना चाहिए. उन्होंने श्रम की महत्ता पर अत्यधिक बल दिया और आजीवन वैज्ञनिक-मानववाद के प्रचार में सक्रीय रहे पर बड़े दुःख कि बात है कि आज लोग रविदास को उनके विचारों से कम और उनके चमत्कारों के लिए अधिक जानते हैं.

संत रविदास (संत रोहिदास) जी का गुढ मृत्यु हुआ था.


संत शिरोमणी रोहीदासनी चालविलेल्या कर्मकांड मुक्तीच्या विचार प्रवाहात त्यांच्या अनुयायांनी चालणे काळाची गरज आहे. अन्यथा संत शिरोमणी रोहिदास महाराजांचे अस्तित्व नष्ट होण्यास काहीच कालावधी लागणार नाही. जागे व्हा... सच्चा अनुयायी बना.


समानतेचे तत्व मांडणारे जगातील पहिले संत रविदास (संत रोहिदास) !!

 
जय संत रोहिदास !!


लेखं- डॉ. विजय कुमार

Monday, January 29, 2018

IPL-2018

IPL-2018
આઇપીએલ સીઝન-11


ચેન્નાઇ સુપરકિંગ્સ: એમએસ ધોની, સુરેશ રૈના, રવિન્દ્ર જાડેજા, ફાફ ડુ પ્લેસિસ, હરભજન સિંહ, ડ્વેન બ્રાવો, શેન વોટસન, કેદાર જાધવ, અંબાતી રાયુડૂ, ઇમરાન તાહિર, કર્ણ શર્મા, શાર્દુલ
ઠાકુર, નારાયણ જગદીશન, મિશેલ સેન્ટનર, દીપક ચહર, કેએમ આસીફ, લુન્ગી નગીડી, કનીષ્ક સેઠ, ધ્રૂવ શૌરી

દિલ્હી ડેરડેવિલ્સ: રિષભ પંત, ક્રિસ મોરિસ, શ્રેયસ ઐયર, ગ્લેન મેક્સવેલ, ગૌતમ ગંભીર, જેસન રોય, કોલિન મુનરો, મોહમ્મદ શમી, કાગિસો રબાડા, અમિત મિશ્રા, પૃથ્વી શો, રાહુલ 
તેવટીયા,વિજય શંકર, હર્ષલ પટેલ, અવેશ ખાન, શાહબાજ નદીમ, ડેન ક્રિશ્ચિયન, જયંત યાદવ, ગુરકીરત માન સિંઘ, ટ્રેન્ટ બોલ્ટ, મનજોત કાલરા,અભિષેક શર્મા, સંદીપ લીમીચન
કિંગ્સ ઇલેવન પંજાબ: અક્ષર પટેલ, આર.અશ્વિન, યુવરાજ સિંહ, કરૂણ નાયર, લોકેશ રાહુલ, ડેવિડ મિલ્લર, એરોન ફિન્ચ, માર્કસ સ્ટોઇનિસ, ક્રિસ ગેલ, મયંક અગ્રવાલ, અંકિત રાજપૂત, 
મનોજ તિવારી, મોહિત શર્મા, મુઝીબ ઝદરાન, બરિન્દર સરન, એન્ડ્ર્યૂ ટાઇ, અક્ષદીપ નાથ, બેન ડ્વેર્શીશ




મુંબઇ ઇન્ડિયન્સ: રોહિત શર્મા, હાર્દિક પંડ્યા, જસપ્રિત બુમરાહ, કિરોન પોલાર્ડ, મુસ્તફિઝુર રહેમાન, પેટ કમિન્સ, સુર્યકુમાર યાદવ, કૃણાલ પંડ્યા, ઇશાન કિશન, રાહુલ ચહર, ઇવિન લુઇસ, 
સૌરભ તિવારી, બેન કટિંગ, પ્રદીપ સાંગવાન, જેપી ડ્યુમિની, જેસન બેહરનડોર્ફ, તજીન્દર સિઁઘ, શરદ લમ્બા


રાજસ્થાન રોયલ્સ: સ્ટીવ સ્મિથ, બેન સ્ટોક્સ, અજિંક્ય રહાણે, સ્ટુઅર્ટ બિન્ની, સંજુ સેમસન, જોસ બટલર, રાહુલ ત્રિપાઠી, ડીઅર્શી શોર્ટ, જોફરા આર્ચર, ક્રિષ્ણપ્પા ગૌતમ, ધવલ કુલકર્ણી, જયદેવ ઉનડકટ, અંકિત શર્મા, અનુરીત સિંઘ, ઝહિર ખાન, શ્રેયસ ગોપાલ, એમએસ મીધુન
રોયલ ચેલેન્જર્સ બેંગલુરૂ: વિરાટ કોહલી, એબીડી વિલિયર્સ, સરફરાઝ ખાન, બ્રેન્ડન મેક્કુલમ, ક્રિસ વોક્સ, કોલિન ડી ગ્રાન્ડહોમ, મોઇન અલી, ક્વિન્ટન ડી કોક, ઉમેશ યાદવ, યુઝવેન્દ્ર ચહલ, મનન વોહરા, કુલવંત ખિજરોલિયા,અનિકેત ચૌધરી, નવદીપ સૈની, મુરુગન અશ્વિન, મનદિપ સિંઘ, વોશિંગ્ટન સુંદર, પવન નેગી, મોહમ્મદ સિરાજ, નાથન કુલ્ટર નાઇલ, અનિરૂદ્ધ જોશી



સનરાઇઝર્સ હૈદરાબાદ: ડેવિડ વોર્નર, ભૂવનેશ્વર કુમાર, શિખર ધવન, કેન વિલિયમસન, શાકિબ અલ હસન, મનિષ પાંડે, કાર્લોસ બ્રેથવેઇટ, યૂસુફ પઠાણ, રિદ્ધિમાન સાહા, રાશિદ ખાન, રિકી ભૂઇ, દીપક હુડ્ડા, સિદ્ધાર્થ કૌલ, ટી.નટરાજન, બાસિલ થમ્પી, ખલીલ અહેમદ, મોહમ્મદ નબી, સંદીપ શર્મા, સચિન બેબી, ક્રિસ જોર્ડન, બીલી સ્ટેનલેક, તન્મય અગ્રવાલ, શ્રીવત્સ ગોસ્વામી



Festival - विश्वकर्मा जयंती

Festival - विश्वकर्मा जयंती
हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान विश्वकर्मा निर्माण एवं सृजन के देवता कहे जाते हैं। माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही इन्द्रपुरी, द्वारिका, हस्तिनापुर, स्वर्ग लोक, लंका आदि का निर्माण किया था। इस दिन विशेष रुप से औजार, मशीन तथा सभी ..

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वास्तुकला के अद्वितीय आचार्य भगवान विश्वकर्मा की जयंती देशभर में प्रत्येक वर्ष को मनाया जाता है. लेकिन कुछ भागों में इसे दीपावली के दूसरे दिन भी मनाया जाता है.
हमारे देश में विश्वकर्मा जयंती बडे़ धूमधाम से मनाई जाती है. इस दिन देश के विभिन्न राज्यों में, खासकर
औद्योगिक क्षेत्रों, फैक्ट्रियों, लोहे की दुकान, वाहन शोरूम, सर्विस सेंटर आदि में पूजा होती है. इस मौके पर
मशीनों, औजारों की सफाई एवं रंगरोगन किया जाता है. इस दिन ज्यादातर कल-कारखाने बंद रहते हैं औरलोग हर्षोल्लास के साथ भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते है.उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, दिल्ली आदि राज्यों में भगवान विश्वकर्मा की भव्य मूर्ति स्थापित की जाती है और उनकी आराधना की जाती है. क्या है मान्यता कहा जाता है कि प्राचीन काल में जितनी राजधानियां थी, प्राय: सभी विश्वकर्मा की ही बनाई कही जाती हैं. यहां तक कि सतयुग का 'स्वर्ग लोक', त्रेता युग की 'लंका', द्वापर की 'द्वारिका' और कलयुग का 'हस्तिनापुर' आदि विश्वकर्मा द्वारा ही रचित हैं. 'सुदामापुरी' की तत्क्षण रचना के बारे में भी यह कहा जाता है कि उसके निर्माता विश्वकर्मा ही थे. इससे यह आशय लगाया जाता है कि धन-धान्य और सुख-समृद्धि की अभिलाषा रखने वाले पुरुषों को बाबा विश्वकर्मा की पूजा करना आवश्यक और मंगलदायी है.कैसे हुई भगवान विश्वकर्मा की उत्पत्ति  एक कथा के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में सर्वप्रथम 'नारायण' अर्थात साक्षात विष्णु भगवान सागर में शेषशय्या पर प्रकट हुए. उनके नाभि-कमल से चर्तुमुख ब्रह्मा दृष्टिगोचर हो रहे थे. ब्रह्मा के पुत्र 'धर्म' तथा धर्म के पुत्र 'वास्तुदेव' हुए. कहा जाता है कि धर्म की 'वस्तु' नामक स्त्री से उत्पन्न 'वास्तु' सातवें पुत्र थे, जो शिल्पशास्त्र के आदि प्रवर्तक थे. उन्हीं वास्तुदेव की 'अंगिरसी' नामक पत्नी से विश्वकर्मा उत्पन्न हुए. पिता की भांति विश्वकर्मा भी वास्तुकला के अद्वितीय आचार्य बने अनेक रूप हैं भगवान विश्वकर्मा के भगवान विश्वकर्मा के अनेक रूप बताए जाते हैं- दो बाहु वाले, चार बाहु एवं दस बाहु वाले तथा एक मुख, चार मुख एवं पंचमुख वाले. उनके मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी एवं दैवज्ञ नामक पांच पुत्र हैं. यह भी मान्यता है कि ये पांचों वास्तु शिल्प की अलग-अलग विधाओं में पारंगत थे और उन्होंने कई वस्तुओं का आविष्कार किया. इस प्रसंग में मनु को लोहे से, तो मय को लकड़ी, त्वष्टा को कांसे एवं तांबे, शिल्पी ईंट और दैवज्ञ को सोने-चांदी से जोड़ा जाता है. विश्वकर्मा पर प्रचलित कथा भगवान विश्वकर्मा की महत्ता स्थापित करने वाली एक कथा है. इसके अनुसार वाराणसी में धार्मिक व्यवहार से चलने वाला एक रथकार अपनी पत्नी के साथ रहता था. अपने कार्य में निपुण था, परंतु विभिन्न जगहों पर घूम-घूम कर प्रयत्न करने पर भी भोजन से अधिक धन नहीं प्राप्त कर पाता था. पति की तरह पत्नी भी पुत्र न  होने के कारण चिंतित रहती थी. पुत्र प्राप्ति के लिए वे साधु-संतों के यहां जाते थे, लेकिन यह इच्छा उसकी पूरी न हो सकी. तब एक पड़ोसी ब्राह्मण ने रथकार की पत्नी से कहा कि तुम भगवान विश्वकर्मा की शरण में जाओ,  तुम्हारी इच्छा पूरी होगी और अमावस्या तिथि को व्रत कर भगवान विश्वकर्मा महात्म्य को सुनो. इसके बाद रथकार एवं उसकी पत्नी ने अमावस्या को भगवान विश्वकर्मा की पूजा की, जिससे उसे धन-धान्य और पुत्र रत्न  की प्राप्ति हुई और वे सुखी जीवन व्यतीत करने लगे. उत्तर भारत में इस पूजा का काफी महत्व है. 
जानें क्या है पूजन विधि भगवान विश्वकर्मा की पूजा और यज्ञ विशेष विधि-विधान से होता है. इसकी विधि यह है कि यज्ञकर्ता पत्नी सहित पूजा स्थान में बैठे. इसके बाद विष्णु भगवान का ध्यान करे. तत्पश्चात् हाथ में पुष्प, अक्षत लेकर मंत्र पढ़े और चारों ओर अक्षत छिड़के. अपने हाथ में रक्षासूत्र बांधे एवं पत्नी को भी बांधे. पुष्प जलपात्र में छोड़े. इसके बाद हृदय में भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें. दीप जलायें, जल के साथ पुष्प एवं सुपारी लेकर संकल्प करें. शुद्ध भूमि पर अष्टदल कमल बनाए. उस पर जल डालें. इसके बाद पंचपल्लव, सप्त मृन्तिका, सुपारी, दक्षिणा कलश में डालकर कपड़े से कलश की तरफ अक्षत चढ़ाएं. चावल से भरा पात्र समर्पित कर विश्वकर्मा बाबा की मूर्ति स्थापित करें और वरुण देव का आह्वान करें. पुष्प चढ़ाकर कहना चाहिए- ‘हे विश्वकर्माजी, इस मूर्ति में विराजिए और मेरी पूजा स्वीकार कीजिए’. इस प्रकार पूजन के बाद विविध प्रकार के औजारों और यंत्रों आदि की पूजा कर हवन यज्ञ करें.
वेद, उपनिषदों में है भगवान विश्वकर्मा के पूजन की गाथा
1. हम अपने प्राचीन ग्रंथो उपनिषद एवं पुराण आदि का अवलोकन करें तो पायेगें कि आदि काल से ही विश्वकर्मा शिल्पी अपने विशिष्ट ज्ञान एवं विज्ञान के कारण ही न मात्र मानवों अपितु देवगणों द्वारा भी पूजित और वंदित है.
2. माना जाता है कि पुष्पक विमान का निर्माण तथा सभी देवों के भवन और उनके दैनिक उपयोग में होने वाली  वस्तुएं भी इनके द्वारा ही बनाया गया है. कर्ण का कुण्डल, विष्णु भगवान का सुदर्शन चक्र, शंकर भगवान का त्रिशूल और यमराज का कालदण्ड इत्यादि वस्तुओं का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया है.
3. हमारे धर्मशास्त्रों और ग्रथों में विश्वकर्मा के पांच स्वरुपों और अवतारों का वर्णन है. विराट विश्वकर्मा, धर्मवंशी विश्वकर्मा, अंगिरावंशी विश्वकर्मा, सुधन्वा विश्वकर्म और भृंगुवंशी विश्वकर्मा.
4. भगवान विश्वकर्मा के सबसे बडे पुत्र मनु ऋषि थे. इनका विवाह अंगिरा ऋषि की कन्या कंचना के साथ हुआ था. इन्होंने मानव सृष्टि का निर्माण किया है. इनके कुल में अग्निगर्भ, सर्वतोमुख, ब्रम्ह आदि ऋषि उत्पन्न हुये है.
5. विश्वकर्मा वैदिक देवता के रूप में मान्य हैं, किंतु उनका पौराणिक स्वरूप अलग प्रतीत होता है. आरंभिक काल से ही विश्वकर्मा के प्रति सम्मान का भाव रहा है. उनको गृहस्थ जैसी संस्था के लिए आवश्यक सुविधाओं का निर्माता और प्रवर्तक माना गया है. वह सृष्टि के प्रथम सूत्रधार कहे गए हैं.
6. विष्णुपुराण के पहले अंश में विश्वकर्मा को देवताओं का देव-बढ़ई कहा गया है तथा शिल्पावतार के रूप में सम्मान योग्य बताया गया है. यही मान्यता अनेक पुराणों में आई है, जबकि शिल्प के ग्रंथों में वह सृष्टिकर्ता भी कहे गए हैं. स्कंदपुराण में उन्हें देवायतनों का सृष्टा कहा गया है. कहा जाता है कि वह शिल्प के इतने ज्ञाता थे कि जल पर चल सकने योग्य खड़ाऊ तैयार करने में समर्थ थे.
7. विश्व के सबसे पहले तकनीकी ग्रंथ विश्वकर्मीय ग्रंथ ही माने गए हैं. विश्वकर्मीयम ग्रंथ इनमें बहुत प्राचीन  माना गया है, जिसमें न केवल वास्तुविद्या बल्कि रथादि वाहन और रत्नों पर विमर्श है. ‘विश्वकर्माप्रकाश’ विश्वकर्मा के मतों का जीवंत ग्रंथ है. विश्वकर्माप्रकाश को वास्तुतंत्र भी कहा जाता है. इसमें मानव और देववास्तु विद्या को गणित के कई सूत्रों के साथ बताया गया है, ये सब प्रामाणिक और प्रासंगिक हैं.

Sunday, January 28, 2018

Bharat nu Bandharan

BHARAT NU BANDHARAN PART 3 BY ANGELGURU FOR ALL COMPATATIVE EXAM


The Constitution of India is the supreme law of India.It lays down the framework defining fundamental political principles, establishes the structure, procedures, powers and duties of government institutions and sets out fundamental rights, directive principles and the duties of citizens. It is the longest written constitution of any sovereign country in the world.. R. Ambedkar, the chairman of the Drafting Committee, is widely considered to be its chief architect.
Constitution of India

The original text of the Preamble
Ratified 26 November 1949

Date effective January 26, 1950; 67 years ago

Signatories 284 members of the Constituent Assembly

FILE NAME: BHARAT NU BANDHARAN

AUTHOR:     ANGEL GURU& SAMAT GADHAVI

FILE SIZE:    112 KB


TET -TAT Social and General

HMAT MATERIALS BY TET HTAT GURU : INDIA GEOGRAPHY


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જનરલ નોલેજ તમામ વિદ્યાર્થીઓ માટે મૂળભૂત જરૂરિયાત છે, જેમ કે યુપીએસસી, આઈબીએસ, એસબીઆઇ, આઈએએસ, જીપીએસસી, આઈબી, આઈએફએસ, આઇપીએસ, એલઆઈસી વગેરે જેવી સ્પર્ધાત્મક પરીક્ષાઓની તૈયારી. અહીં તમે બધી સ્પર્ધાત્મક પરીક્ષાઓ માટે શ્રેષ્ઠ સામાન્ય જ્ઞાન પુસ્તકો મેળવી શકો છો અથવા જોઈ શકો છો. આ તમામ સામાન્ય જ્ઞાન પુસ્તકોનો ઉપયોગ કરીને તમે ભારતીય ઇતિહાસ, ભારતીય ભૂગોળ, ભારતીય બંધારણ, ભારતીય નીતિ, નવીનતમ વર્તમાન અફેર, વિશ્વ જી.કે., વિજ્ઞાન અને તકનીક વગેરે જેવી વિવિધ વિષયોની તૈયારી કરી શકો છો. અહીં તમે આ બધી જ સામાન્ય જ્ઞાન પુસ્તકો ખરીદી શકો છો જે માટે સૌથી વધુ ઉપયોગી છે. બધી સ્પર્ધાત્મક પરીક્ષાઓની તૈયારી 2018